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कुछ लोगों के लिए बधिरता या हियरिंग लॉस बहुत ही डरावनी चीज़ हो सकता है और उन लोगों को यह पूरे समय एक्सपीरियंस होता रहता है | अच्छी बात यह है कि ऐसे कई तरीके हैं जिनसे आप खुद अपनी हियरिंग या सुनने की क्षमता को इम्प्रूव कर सकते हैं या डैमेज से खुद को बचा सकते हैं | अगर आप पहले से ही बधिरता एक्सपीरियंस कर रहे हैं तो इस परेशानी को ठीक करने के लिए डॉक्टर से कई तरीके के ऑप्शन्स के बारे में पूछें | सबसे पहले आप सुनने की क्षमता को डैमेज होने से बचाने की कोशिश करें | अपनी रोजमर्रा की लाइफ में कुछ आसान सी ट्रिक्स अपनाकर आप अपनी सुनने की क्षमता को लम्बे समय तक मेन्टेन रख सकते हैं |

विधि 1
विधि 1 का 3:

मेडिकल ट्रीटमेंट

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  1. अगर आपको सुनने में परेशानी महसूस हो तो डॉक्टर को दिखाएँ: अगर बहरेपन के कारण आपकी रोजमर्रा की जिन्दगी प्रभावित होने लगे तो समझ जाएँ की अब डॉक्टर को दिखाने का समय आ गया है | डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लें और डॉक्टर को अपने कान को एक्सामिन करने दें जिससे बहरेपन के कारणों का पता लगाकर उनका सही उपाय खोजा जा सके | [१]
    • कान को एक्सामिन करने के लिए डॉक्टर कान का इंस्पेक्शन करते हैं और कुछ आसान से हियरिंग टेस्ट करते हैं | कुछ डॉक्टर्स के पास स्पेशलाइज्ड इक्विपमेंट होते हैं जिनसे आपके कान के परदे को ज्यादा बेहतर तरीके से टेस्ट किया जा सकता है |
    • डॉक्टर आपको और ज्यादा टेस्ट करवाने के लिए कर्ण रोग विशेषज्ञ (otolaryngologist) या ऑडियोलोजिस्ट के पास भेज सकते हैं | इससे सटीक रूप से पता चल सकता है की बहरेपन का एकदम सही कारण क्या है और उसे कैसे ठीक किया जा सकता है |
    • हालाँकि किसी भी तरह से बहरापन होने, विशेषरूप से एक कान में बहरापन होने पर आपको एग्जामिनेशन कराने पड़ेंगे क्योंकि यह एक सीरियस मेडिकल प्रॉब्लम हो सकती है | इस केस में डॉक्टर को दिखाने में हिचकिचाएं नहीं |
  2. अगर आपकी कर्ण नलिका ब्लॉक हो गयी है तो डॉक्टर कान के मैल (earwax) को हटा देंगे: कुछ केसेस में, बहरापन, कान में मैल जमा हो जाने के कारण होता है | डॉक्टर कान का एक्सामिन करने पर ही इसे देख लेंगे | अच्छी बात यह है कि इसे बहुत आसानी से ठीक किया जा सकता है | डॉक्टर छोटे से टूल या वैक्यूम से कान के मैल को हटा देंगे | कर्ण नलिका साफ़ होने पर सुनने की क्षमता सुधर जाती है | [२]
    • डॉक्टर आपको कुछ इयर ड्रॉप्स देकर भी घर भेज सकते हैं जो कान के मैल को डिसोल्व कर देगी | इसे डॉक्टर के दिए गये निर्देशों के अनुसार ही इस्तेमाल करें | [३]
    • घर पर खुद से इयर वैक्स या कान के मैल को निकालने की कोशिश न करें | ऐसा करने पर आप अपने कान के परदे को डैमेज कर सकते हैं और इससे परमानेंटली बहरापन आ सकता है |
  3. अगर आपका आंतरिक कर्ण डैमेज हो हो गया है तो हियरिंग ऐड का इस्तेमाल करें: डैमेज होने या बुढ़ापा आने पर होने वाला बहरापन नेचुरली रिवर्सेबल नहीं होता | अच्छी बात यह है कि कुछ ऐसी डिवाइस आती हैं जो आपके सुनने की क्षमता को फिर से पाने में मदद कर सकती हैं | इनमे सबसे कॉमन हैं- सुनने की मशीन (hearing aid) | ये छोटी सी डिवाइस होती हैं जो कान में फिट हो जाती हैं और साउंड को एम्पलीफाई करती हैं जिससे आपको बेहतर रूप से सुनाई देता है | इनसे पूरी तरह से सुनने की क्षमता वापस नहीं आती लेकिन ये आपकी रोज्मरा की जन्दगी को काफी आसान बना देती हैं | [४]
    • आमतौर पर कई तरह के हियरिंग ऐड मिलते हैं | ये कई तरह की रेंज में मिलते हैं जिनमे कान की ओपनिंग में फिट होने वाले हियरिंग ऐड से लेकर पूरे कान को ढंकने वाले बड़े हियरिंग ऐड तक शामिल हैं | इनमे ज्यादा पावरफुल हड्डी पर लटकने वाले (bone-anchored) हियरिंग ऐड्स भी होते हैं | डॉक्टर आपके लिए बेहतर ऑप्शन चुनने में मदद कर सकते हैं | [५]
    • बाज़ार में भी ऐसे कई हियरिंग ऐड्स मिलते हैं जो हलकी बधिरता में मदद कर सकते हैं | लेकिन ये डॉक्टर द्वारा बताये गये हियरिंग ऐड्स जितने प्रभावी नहीं होते और व्यापक रूप से उपलब्ध भी नहीं होते | इन डिवाइसेस के फायदे के बारे में जानने के लिए डॉक्टर से परामर्श लें | [६]
  4. अगर हेअरिन ऐड्स से काम न बने तो कोक्लियर इम्प्लांट (cochlear implant) के बारे में सोचें: कई बार, आंतरिक कर्ण में काफी डैमेज हो जाता है जिससे साउंड ऑडिटरी नर्व तक नहीं पहुँच पाता | यह काफी मुश्किल दौर होता है लेकिन इसके लिए एक खुशखबरी भी है | इस परेशानी से प्रभावित लोगों के लिए कोक्लियर इम्प्लांट एक सुनहरा अवसर होता है | यह डिवाइस कर्ण नलिका में बायपास की जाती है और साउंड को डायरेक्टली ऑडिटरी नर्व तक लाया जाता है | [७] सर्जन एक माइनर सर्जिकल प्रोसीजर के जरिये इम्प्लांट को इंस्टाल कर देंगे और अगर ऑडिटरी नर्व स्वस्थ हो जाती है तो सुनने की क्षमता भी सुधर जाएगी |
    • कोक्लियर इम्प्लांट के बाहरी हिस्से को हियरिंग ऐड की तरह हटाया जा सकता है जिससे आप इसे आसानी से पहन और निकाल सकते हैं | [८] लेकिन आप इम्प्लांट के इंटरनल पार्ट को नहीं निकाल सकते |
  5. कर्ण नलिका में मौजूद असामान्यताओं को ठीक करने के लिए माइनर सर्जरी कराएं: कुछ केसेस में, कान के अंदर की हड्डियाँ या स्ट्रक्चर सही तरीके से बने नहीं होते जिसके कारण बहरापन आ सकता है | माइनर सर्जिकल प्रोसीजर से ऐसे इशू ठीक किये जा सकते हैं और सुनने की क्षमता को सुधारा जा सकता है | कोई इयर स्पेसिलिस्ट आपको बता सकते हैं आपको सर्जरी की जरूरत होगी या नहीं और वे आपको उसकी प्रोसेस के बारे में भी बताएँगे | [९]
    • अगर आपको लगातार कान में इन्फेक्शन बना ही रहता है तो आपको सर्जरी भी करानी पड़ सकती है | इस स्थिति में कान से फ्लूड सही तरीके से ड्रेन नहीं हो पाता |
  6. अगर कोई दवा खाने के बाद सुनने में कमी आ रही हो तो डॉक्टर को बताएं: कुछ मेडिसिन को ऑटोटॉक्सिक कहा जाता है जिनके कारण बहरापन आ सकता है | लगभग 200 से भी ज्यादा मेडिकेशन को इस कैटोगरी में रखा गया है और सच में ऐसा कोई विश्वसनीय तरीका नहीं है जिससे यह पता लगाया जा सके कि किस व्यक्ति को इस तरह के साइड इफेक्ट्स होंगे | इसका पता लगाने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि आप अपनी सुनने की क्षमता को मॉनिटर करते रहें और दवा लेने के बाद अगर कोई परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर को बताएं | [१०]
    • कुछ दवाओं से टेम्पररी बहरापन आ सकता है जिनमे एस्पिरिन, क़ुइनिन (quinine) जैसी सैलिसिलेट पैन रिलीवर दवाए और कुछ डाययुरेटिक शामिल हैं |
    • दूसरी दवाओं से परमानेंट बहरापन भी आ सकता है, अगर आप इन्हें काफी लम्बे समय तक इस्तेमाल करें तो | इनमे जेंटामायसिन (gentamicin) जैसी एंटीबायोटिक्स और कीमोथेरेपी वाली दवाएं शामिल होती हैं |
    • अगर आप एक ही समय पर कई तरह की ऑटोटॉक्सिक मेडिसिन या उनके हाई डोज़ लेते हैं तो बहरापन होना सबसे ज्यादा कॉमन होता है | बहरेपन की संभावना को कम करने के लिए हमेशा डॉक्टर के द्वारा दिए गये निर्देशों के अनुसार ही मेडिकेशन लें | [११]
विधि 2
विधि 2 का 3:

नेचुरली सुनने की क्षमता को सुधारें

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  1. अपनी सुनने की क्षमता को सुधारने के लिए साउंड लोकेशन एक्सरसाइज आजमायें: आप प्रैक्टिस के साथ अपने हियरिंग को मेन्टेन रख सकते हैं य उसमे सुधार ला सकते हैं | किसी से अलार्म जैसे बार-बार शोर करने वाले आइटम छिपाकर रखने के लिए कहें | इसके अलावा, टीवी चलाने से भी वातारण शोरगुल वाला बन जाता है | इस तरह के साउंड को बंद करने की कोशिश करें और इन्हें बंद करने की तरकीब लगायें | ऐसा बार-बार करने से आपकी स्पेसिफिक साउंड पर फोकस करने की क्षमता बढ़ने लगेगी | [१२]
    • इसी तरह की हियरिंग एक्सरसाइज के लिए किसी शोरगुल वाले वातावरण में किसी व्यक्ति के द्वारा पढ़ी जा रही कोई किताब को सुनने की कोशिश करें | ध्यान भंग करने वाले शोर को ब्लाक करें और केवल रीडिंग पर भी फोकस करने की कोशिश करें |
    • अगर आपको पहले से ही बहरापन हो तो साउंड लोकेशन एक्सरसाइज से कोई फायदा नहीं होगा | आपको मेडिकल एग्जामिनेशन कराने होंगे और इसे ठीक करने के लिए हियरिंग ऐड्स पहनने होंगे |
  2. कान की हेल्थ को सपोर्ट करने के लिए हेल्दी डाइट लें: दूसरे बॉडी पार्ट्स के समान ही, कानों को भी सही तरीके से काम करने के लिए सही न्यूट्रीशन की जरूरत होती है | विशेषरूप से, पर्याप्त जिंक, पोटैशियम, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, विटामिन D और ओमेगा-3 कर्ण नलिका में होने वाले इंफ्लेमेशन को कम करते हैं और सुनने की क्षमता में होने वाले डैमेज से बचाते हैं | आप ये सभी न्यूट्रीएंट्स हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट से पा सकते हैं | [१३]
    • कुछ हेल्दी फूड्स में शामिल हैं- हरी पत्तेदार सब्जियां, केले, नट्स और सीड्स और लो-फैट डेरी प्रोडक्ट्स |
    • अगर आपको अपनी डाइट से पर्याप्त न्यूट्रीएंट्स नहीं मिल पाते तो आप डाइटरी सप्लीमेंट भी ले सकते हैं | कोई भी सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें जिससे आप सुनिश्चित कर सकें की वे आपके लिए उचित हैं |
  3. सुनने की क्षमता को मेन्टेन रखने के लिए नियमित एक्सरसाइज करें: एरोबिक एक्सरसाइज और श्रवण स्वास्थ्य के बीच सच में कनेक्शन होता है | जब तक आपके कण में कोई डैमेज न हो, नियमित एक्सरसाइज करने से सुनने की क्षमता को बढाने और बुढ़ापे में भी उसे मेन्टेन रखने में मदद मिल सकती है | बेहतर रिजल्ट्स के लिये, हर सप्ताह कम से कम 5 दिन 20 से 30 मिनट के लिए एरोबिक एक्सरसाइज करें | [१४]
    • रनिंग, बाइकिंग, स्विमिंग या किकबॉक्सिंग जैसी एरोबिक एक्सरसाइज वो एक्टिविटी होती हैं जो आपकी हार्ट रेट को बढ़ा देती हैं | आप रोज़ वॉक पर भी जा सकते हैं |
    • वेट ट्रेनिंग जैसी रेजिस्टेंस एक्सरसाइज भी आपके स्वास्थ्य के लिए बेहतर होती है लेकिन इनका सुनने की क्षमता को सुधारने से कोई सम्बन्ध नहीं है | इस तरह के फायदों के लिए आपको एरोबिक एक्सरसाइज करनी होगी |
  4. संभव है की स्ट्रेस और एंग्जायटी से आपके सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाए | [१५] अगर आप नियमित रूप से स्ट्रेस फील करते हैं तो रिलैक्स होने के लिए थोड़ी नींद लें और खुद को डी-स्ट्रेस करें | शांत दिमाग सुनने की क्षमता को सुधार सकता है |
    • मैडिटेशन, योग या डीप ब्रीथिंग जैसी रिलैक्सेशन एक्सरसाइज आजमायें | इन्हें दिन में थोड़ी देर तक करने से भी काफी बदलाव देखा जा सकता है |
    • आनंददायक एक्टिविटीज करने से भी स्ट्रेस काफी हद तक कम किया जा सकता है | इसलिए अपनी हॉबी के लिए भी समय निकाले जिससे आप त्नाव्व को अपने ऊपर हावी न होने दें |
    • याद रखें, इससे सच में कान का कोई डैमेज सुधरेगा नहीं इसलिए जब भी आप तेज़ शोरगुल में रहने पर आप हियरिंग ऐड्स पहन सकते हैं |
  5. टिनिटस कानों में लगातार घंटी बजने या भँवरे के गुनगुनाने जैसी आवाज़ होती है जो आमतौर पर बहरेपन की शुरूआती स्टेज मानी जाती है | हालाँकि बहुत कम ऐसे प्रमाण मिलते हैं कि इनमे नेचुरल रेमेडीज से कोई बड़ा बदलाव आता हो लेकिन कुछ हर्बल ट्रीटमेंट सच में मदद कर सकते हैं | अगर आपको टिनिटस फील हो तो अपने डॉक्टर से सलह लेने के बाद आप इनमे से कुछ सप्लीमेंट ले सकते हैं : [१६]
    • जिन्को बाईलोबा (Ginkgo biloba)
    • जिंक
    • विटामिन B
विधि 3
विधि 3 का 3:

अपने कानों की सुरक्षा करें

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  1. तेज़ शोरगुल में बने रहना, बहरेपन का मुख्य कारण है | जितना हो सके, तेज़ शोरगुल वाले माहौल और कोलाहल वाली सिचुएशन से दूर रहें | इससे सुनने की क्षमता को मेन्टेन रखने और डैमेज से बचने में मदद मिल सकती है | [१७]
    • आमतौर पर, अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति से तेज़ आवाज़ में बात कर रहे हो या दोनों एक-दूसरे पर चिल्ला रहे हों तो ऐसा वातावरण काफी शोरगुल वाला बन जाता है |
    • 85 डेसिबल से ज्यादा साउंड या मोटरसाइकिल के इंजन से आने वाली तेज़ आवाज़ सुनने की क्षमता के लिए हानिकारक हो सकती है | आप वर्तमान डेसिबल लेवल को नापने के लिए स्मार्टफोन पर एप डाउनलोड कर सकते हैं और पता लगा सकते हैं कि वातावरण में कितना शोर है |
  2. जब भी तेज़ शोरगुल वाली जगह पर जाएँ तो इयर प्रोटेक्शन पहनें: आप हमेशा तेज़ शोर से बच नहीं सकते, विशेषरूप से अगर यह आपके काम का ही एक हिस्सा हो तो | इस तरह के केसेस में, कानों को डैमेज होने से बचाने के लिए आपको हमेशा इयर प्रोटेक्शन पहनने चाहिए | [१८] अपने पास इयरप्लग रखें क्योंकि ये अधिकतर शोरगुल वाली कंडीशन में मदद करते हैं लेकिन प्रोटेक्टिव इयरमफ़ और भी ज्यादा साउंड को ब्लॉक कर सकते हैं और हर तरह के टेस शोरगुल के लिए बेहतरीन होते हैं |
    • अगर आप पॉवर टूल्स का इस्तेमाल करते हों या हैवी इक्विपमेंट्सके आसपास काम करते हैं तो यह विशेषरूप से जरुरी हो जाता है | लम्बे समय तक इन डिवाइसेस के आसपास काम करने से कानों में बहुत ज्यादा डैमेज हो सकते हैं |
    • यह बारटेंडर्स या कॉन्सर्ट वेन्यू में काम करने वाले लोगों के लिए भी बहुत जरुरी होता है | इन जगहों पर बजने वाले म्यूजिक आमतौर पर बहुत तेज़ शोर वाले होते हैं |
    • अवांछित तेज़ शोर वाली सिचुएशन से बचने के लिए अपने साथ इयरप्लग रखें | इस तरह से, आप हमेशा अपने कानों को प्रोटेक्ट करने के लिए तैयार रहेंगे | [१९]
  3. हेडफोन्स का इस्तेमाल करते समय वॉल्यूम धीमा रखें: हेडफोन्स म्यूजिक को डायरेक्ट कान के परदे तक ले जाते हैं जिससे बहरापन होने की संभावना बहुत ज्यादा हो जाती है | इसलिए कसी भी तरह के बहरेपन से बचने के लिए वॉल्यूम हमेशा कण्ट्रोल में रखें | [२०]
    • अगर आप सुनने के लिए दूसरे साउंड से ज्यादा तेज़ म्यूजिक Iचलाते हैं तो नॉइज़-कैन्सिलिंग हेडफोंस का इस्तेमाल करें |
  4. कान में मौजूद कोई भी चीज़ कान के परदे को डैमेज कर सकती है और इससे बहरापन हो सकता है | कॉटन स्वाब, ट्वीज़र या अपनी अंगुली को कान में न डालें | [२१]
    • आपके कान खुद अपने आप साफ़ होंते रहते हैं इसलिए आपको कॉटन स्वाब से इयर वैक्स को निकालने की कोई जरूरत नही है |
    • अगर आपके कान में कुछ फंस जाए तो खुद उसे बाहर निकालने की कोशिश करने की बजाय तुरन्त डॉक्टर के पास या इमरजेंसी रूम जाएँ |
  5. धूम्रपान छोड़ें जिससे कानों को डैमेज होने से बचाया जा सके: ऐसे प्रमाण मिलते हैं कि स्मोकिंग से कानों में ब्लड फ्लो कम हो जाता है जिससे सुनने की क्षमता डैमेज हो जाती है | अगर आप स्मोकिंग करते हैं तो जितना जल्दी हो सके, इसे छोड़ दें और अगर आप स्मोकिंग नहीं करते तो इसे शुरू ही न करें | [२२]
    • सेकंडहैण्ड स्मोक भी काफी हानिकारक होती है और इसके कारण भी ऐसे ही डैमेज हो सकते हैं | धुएं वाले वातावरण से बचें और घर में भी किसी को धुँआ न करने दें |

सलाह

  • कान में घंटियाँ सुनाई देने को टिनिटस भी कहा जाता है जो आंतरिक कर्ण के डैमेज होने का संकेत होता है और बहरेपन का कारण बन सकता है |
  • अगर आप शोरगुल वाले कॉन्सर्ट या शो में जाएँ तो कुछ दिनों बाद तक तेज़ शोर से बचें जिससे कानों को थोडा आराम मिल सके | इससे और ज्यादा डैमेज होने से रोका जा सकता है |
  • हियरिंग ऐड और कोचलर इम्प्लांट पूरी तरह से ऑप्शनल हैं | अगर आप इन्हें पहनना नहीं चाहते तो न पहनें |
  • बहरापन कोई त्रासदी या दुखद घटना नहीं है | आप बहरेपन के साथ भी खुशनुमा जिन्दगी जी सकते हैं |

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